तमक (लौंग) घाटी की चीख: 21 साल से सड़क का इंतजार, अब विस्थापन की मजबूरी

बुलंद आवाज न्यूज़ 

चमोली। उत्तराखंड के सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों में विकास की रफ्तार आज भी कई सवाल खड़े करती है। तमक (लौंग) घाटी के ग्रामीण पिछले 21 वर्षों से सड़क की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2005 में सड़क निर्माण की स्वीकृति मिलने के बावजूद वर्ष 2026 तक ग्रामीणों को सड़क सुविधा का लाभ नहीं मिल सका है। इससे क्षेत्र के लोगों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन हर बार निर्माण के रास्ते में चट्टानों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला दिया जाता है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रदेश के अन्य दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सुरंग, कटिंग और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक के माध्यम से सड़कें बनाई जा रही हैं, तो तमक (लौंग) घाटी को सड़क सुविधा से वंचित क्यों रखा जा रहा है।

आपदा के दौरान बढ़ जाती है मुश्किल

हालिया आपदा के बाद क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां एक बार फिर सामने आई हैं। आपदा के समय राहत और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क सुविधा के अभाव में बीमार और जरूरतमंद लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए आज भी डोली का सहारा लेना पड़ता है।

21 साल बाद भी नहीं बदली तस्वीर

वर्ष 2005 में सड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही उनका गांव सड़क से जुड़ जाएगा। लेकिन दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से यह मामला फाइलों में उलझा हुआ है और अब भी चट्टानों का हवाला देकर सड़क निर्माण को कठिन बताया जा रहा है।

पलायन नहीं, विकास चाहते हैं ग्रामीण

सड़क सुविधा के अभाव और लगातार बढ़ती मुश्किलों के बीच अब ग्रामीण विस्थापन की बात करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति अपनी पुश्तैनी जमीन, खेत और गांव छोड़ना नहीं चाहता, लेकिन जब मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न हों और आपदा या बीमारी के समय जीवन संकट में पड़ जाए तो गांव में रहना मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से तमक (लौंग) गांव की सड़क समस्या का उच्चस्तरीय संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने सड़क निर्माण में आ रही तकनीकी एवं भौगोलिक बाधाओं का आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से समाधान निकालते हुए कार्य शुरू कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सीमांत गांवों तक सड़क पहुंचाना केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि वहां की आबादी को गांवों में बनाए रखने और सीमांत क्षेत्रों को मजबूत करने की आवश्यकता भी है। उन्होंने सड़क निर्माण में हो रही देरी की जिम्मेदारी तय करने और तमक (लौंग) गांव को जल्द सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की है।

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