
टिहरी में 25 दिन तक चला विशेष अभियान, दुर्घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर तैयार होगी भविष्य की कार्ययोजना
टिहरी गढ़वाल: पर्वतीय और मैदानी मार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से टिहरी गढ़वाल में चलाया गया विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण अभियान गुरुवार को संपन्न हो गया। जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल के दिशा-निर्देशों पर परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभियान में वाहन चालकों और परिचालकों के स्वास्थ्य के साथ उनकी कार्य परिस्थितियों, रहन-सहन और आर्थिक स्थिति का भी अध्ययन किया गया।

छह क्षेत्रों में आयोजित हुए शिविर
21 सितंबर से 15 अक्टूबर 2026 तक चले इस अभियान के तहत तपोवन, देवप्रयाग, कानाताल, जाख ढालवाला, मुनिकीरेती और भद्रकाली में शिविर आयोजित किए गए। अभियान के अंतिम चरण में 13 से 15 अक्टूबर तक मुनिकीरेती के गंगा वाटिका मुख्य द्वार और भद्रकाली तिराहे पर मोबाइल यूनिट के माध्यम से चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
इस दौरान ऑटो, विक्रम, ई-रिक्शा, स्कूल बस, वैन और मालवाहक वाहनों के चालकों एवं परिचालकों पर विशेष ध्यान दिया गया। स्वास्थ्य जांच के साथ उनके काम के घंटे, विश्राम की स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि और आर्थिक परिस्थितियों से संबंधित जानकारी भी जुटाई गई।

संयुक्त परिवहन आयुक्त ने किया निरीक्षण
अभियान के समापन अवसर पर संयुक्त परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड राजीव मेहरा ने भद्रकाली तिराहे पर पहुंचकर शिविर का स्थलीय निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आमतौर पर सड़क सुरक्षा अभियानों में चालान और तकनीकी पहलुओं पर अधिक ध्यान दिया जाता है। ऐसे में चालकों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य और उनकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को दुर्घटनाओं के संभावित कारणों से जोड़कर देखना एक अभिनव और दूरगामी कदम है। उन्होंने इस जनहितकारी पहल के लिए सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय (प्रवर्तन), टिहरी के एआरटीओ ज्योति शंकर मिश्र और उनकी पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की।

स्वास्थ्य और आर्थिक परिस्थितियों का होगा विश्लेषण
संयुक्त परिवहन आयुक्त ने शिविर के दौरान जुटाए गए आंकड़ों का गहन विश्लेषण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबी ड्यूटी, नींद की कमी, तनाव, रक्तचाप और दृष्टि संबंधी समस्याएं वाहन चलाते समय दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं। समय पर स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार से इन जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही चालकों पर आर्थिक दबाव, काम के अनियमित घंटे और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे कारकों का भी अध्ययन किया जाएगा। इन परिस्थितियों और सड़क दुर्घटनाओं के बीच संबंधों का वैज्ञानिक विश्लेषण भविष्य की नीतियों और सड़क सुरक्षा संबंधी कार्ययोजनाओं को तैयार करने में सहायक होगा।

विभागीय समन्वय से सफल हुआ अभियान
परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और उप जिला चिकित्सालय नरेंद्रनगर के समन्वय से अभियान संचालित किया गया। इस दौरान आम लोगों और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित किए बिना शिविर आयोजित किए गए। स्थानीय वाहन यूनियनों और चालकों ने भी इस पहल की सराहना की।
यह अभियान सड़क सुरक्षा के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें नियमों के पालन के साथ चालकों के स्वास्थ्य, कार्य परिस्थितियों और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को भी महत्व दिया गया है। जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण दुर्घटनाओं के संभावित कारणों की पहचान करने और भविष्य में प्रभावी उपाय तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।







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