बुलंद आवाज न्यूज़
सोनिया मिश्रा/ देहरादून
आवाज़ नहीं है, लेकिन चेहरे की मुस्कान और चमक के साथ हाथों के अलग-अलग इशारों से हर किसी को अपनी ओर खींच लेने वाले उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी 22 वर्षीय ‘गुरुसेवक’ आज हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुके हैं। उनकी जिंदगी एक सच्चाई को साबित करती है — प्रतिभा किसी आवाज़ की मोहताज नहीं होती है। बिना शब्दों के भी वह अपनी कला और भावनाओं से लोगों के दिलों तक पहुंच जाते हैं।
महज 5 वर्ष की उम्र में गुरुसेवक अनमोल फाउंडेशन से जुड़े, जहां से उनके जीवन को नई दिशा मिली। बचपन से ही रंग और रेखाएं ही उनकी भाषा बन गईं और स्केच आर्ट उनके आत्मविश्वास का माध्यम। उनके कोच बताते हैं कि आज गुरुसेवक देश के प्रधानमंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के स्केच तैयार कर चुके हैं। उनके बनाए चित्र केवल चेहरे नहीं उकेरते, बल्कि संघर्ष, उम्मीद और आत्मनिर्भरता की कहानी भी बयां करते हैं। बिना बोले भी उनके चित्र बहुत कुछ कह जाते हैं और देखने वालों को भावुक कर देते हैं।
इन दिनों देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित “दिव्य कला मेला 2026” में गुरुसेवक अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। देशभर से आए 100 से अधिक दिव्यांग शिल्पकार और उद्यमी इस मेले में अपनी प्रतिभा के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत का संदेश दे रहे हैं।
मेले में गुरुसेवक का स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उनकी मुस्कान, आत्मविश्वास और कला हर व्यक्ति को प्रेरित कर रही है। अनमोल फाउंडेशन से शुरू हुआ उनका सफर आज राष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है और उनकी कहानी यह संदेश देती है कि जब हौसले मजबूत हों, तो खामोशी भी सफलता की सबसे बुलंद आवाज़ बन जाती है।






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