आज खुले 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित फ्यूला नारायण मंदिर के कपाट, सदियों पुरानी परंपरा आज भी है जीवंत

बुलंद आवाज न्यूज़ 

चमोली

उत्तराखंड के चमोली जनपद की सुरम्य वादियों में लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पौराणिक फ्यूला नारायण मंदिर के कपाट आज श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। यह मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विशेष पहचान रखता है।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पुरुष पुजारी के साथ महिला पुजारी भी भगवान नारायण की सेवा और पूजा-अर्चना करती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ निभाई जा रही है।

मान्यता है कि भगवान नारायण को ‘सातूं वाड़ी’ का भोग सबसे अधिक प्रिय है, जिसे विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। मंदिर के कपाट प्रत्येक वर्ष श्रावण संक्रांति (15-16 जुलाई के आसपास) को खोले जाते हैं और नंदा अष्टमी के बाद नवमी तिथि को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। यह हजारों वर्षों से चली आ रही परंपरा है।

मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान हैं। उनके साथ महालक्ष्मी, जय-विजय द्वारपाल के रूप में स्थापित हैं। इसके अलावा क्षेत्रपाल, घंटाकर्ण, नंदा-सुनंदा देवियां, जग देवता और बंदेबियां की भी विधिवत पूजा की जाती है। यहां आज भी ऋषि परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न होती है।

मंदिर की एक और अनूठी परंपरा यह है कि भरकी, भेंटा, पिलखी, गंवाणा और अरोसी गांवों के लोगों द्वारा हर वर्ष क्रमवार एक परिवार को पुजारी नियुक्त किया जाता है, जो पूरे श्रद्धाभाव से भगवान नारायण की सेवा करता है।

घने देवदार और बुरांश के जंगलों से घिरा यह मंदिर प्रकृति की गोद में स्थित है। चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अद्भुत अनुभव कराते हैं।

ऐसे पहुंचें फ्यूला नारायण मंदिर

ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हेलंग तक सड़क मार्ग से लगभग 240 किलोमीटर की यात्रा बस, कार या मोटरसाइकिल से की जा सकती है। हेलंग से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर भरकी गांव तक जीप या कार से पहुंचा जा सकता है। इसके बाद करीब 5 किलोमीटर का पैदल ट्रैक तय कर श्रद्धालु फ्यूला नारायण धाम पहुंचते हैं।

यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

मंदिर परिसर में सामान्य रूप से रुकने की व्यवस्था उपलब्ध रहती है। भोजन के लिए भंडारे की व्यवस्था भी की जाती है, लेकिन यात्रियों को अपनी आवश्यक सामग्री साथ रखने की सलाह दी जाती है। ऊंचाई अधिक होने के कारण गर्म कपड़े अवश्य साथ रखें। भरकी गांव से स्थानीय गाइड भी उपलब्ध हो जाते हैं, जिनकी सहायता से यात्रा और अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनती है।

आस्था, प्रकृति और प्राचीन ऋषि परंपरा का अद्भुत संगम फ्यूला नारायण मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य तीर्थस्थल है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु भगवान नारायण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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