बुलंद आवाज़ न्यूज़
बीमार लोगों को उनके घर पर जाकर दवाएं पहुंचाएंगी। आशाओं को टेलीमेडिसिन सेवाओं से जोड़ा जाएगा और इसके लिए उन्हें अलग से इंसेटिव दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संदर्भ में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। योजना के अनुसार पहले राज्य में टेलीमेडिसिन सेवाओं को मजबूत किया जाएगा और फिर टेलीमेडिसिन से आशाओं को जोड़ा जाएगा।
आशाओं का रोल यह होगा कि वह मरीज को डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली दवाएं उनके घर तक पहुंचाएंगी। दरअसल टेलीमेडिसिन सेवाओं के तहत अभी मरीजों को डॉक्टर तो ऑन लाइन मिल रहे हैं लेकिन दवाओं के लिए अस्पताल जाना ही पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए अब आशाओं को भी योजना से जोड़ा जा रहा है ताकि मरीजों को दवा के लिए भी चक्कर न काटने पड़ें।
राज्य में 12 हजार आशाएं
राज्य में 12 हजार से अधिक आशाएं हैं जो हर गांव और घर से जुड़ी हुई हैं। इसके बाद अब सरकार आशाओं को टेलीमेडिसिन सेवाओं से भी जोड़ रही है। आशाओं के पास स्वास्थ्य विभाग के ऐसे अनेक काम हैं जिसके तहत वह घर-घर जाकर मरीजों को सुविधाएं देती हैं। इसलिए मरीजों तक दवा पहुंचाने का काम भी उन्हीं से कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि, राज्य में टेलीमेडिसिन सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत अब मरीजों को घर तक दवा देने की भी योजना है। इसके लिए टेलीमेडिसिन योजना से आशाओं को जोड़ा जाएगा और फिर आशाएं घर जाकर मरीजों को दवाएं देंगी। इसके बदले उन्हें इंसेंटिव भी दिया जाएगा।
लगेंगे 1200 से अधिक मोबाइल टावर
राज्य में सरकार संचार सेवाओं को मजबूत कर रही है। इसके तहत राज्य भर में अगले कुछ सालों में 1200 से अधिक मोबाइल टावर लगने हैं। इससे पहाड़ के अधिकांश गांवों तक मजबूत संचार नेटवर्क होगा और इंटरनेट की स्थिति भी अच्छी होगी। इससे टेलीमेडिसिन सेवाओं को और मजबूती मिलेगी और मरीजों को घर पर ही समुचित इलाज की सुविधा मिलेगी।





More Stories
रुद्रप्रयाग: बच्चे को उठा ले गया गुलदार, जिला प्रशासन की 6 अलग अलग टीमें चला रहीं सर्च अभियान
मक्कूमठ में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी, ग्रोथ सेंटर से बदली आजीविका
दून मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों को मिला नई टीचिंग स्ट्रेटजी का प्रशिक्षण